जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।
सत्-चित्-आनंद रूपिणी, भुक्ति मुक्ति दाता ॥ ध्रु० ॥
श्वेत वसन कमलासनि, देवि प्रभा-पुंजा ।
अक्ष-सूत्र कमंडलु, कर-कमल मंजु ॥ १ ॥
वेद-त्रयी की जननी, ज्ञान-गंग-धारा ।
ऋषि-मुनि-सुर-नर ध्यावत, पावन संसारा ॥ २ ॥
सद्बुद्धि का वर पावे, जो नित गुण गावै ।
भव-बंधन से छूटै, परम पद पावै ॥ ३ ॥
जयति जय गायत्री माता ॥ ध्रु० ॥
शरण पड़े की रक्षा, कीजो कल्याणी ।
हृदय में वास करो हे, महा-वरदानी ॥ ४ ॥
जयति जय गायत्री माता ॥ ध्रु० ॥