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श्री कृष्ण / बालकृष्णआरती~1 मिनिटे

आरती कुंजबिहारी की (श्री कृष्ण आरती)

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ॥ धृ. ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।

श्रवण में कुण्डल झलकाता, सिर मोर मुकुट लसकाता ।

छवि लखि मोहि जुगल लाला ॥ १ ॥

जहां ते प्रगटी गंगा, कलुष कलिहारिणि श्रीगंगा ।

स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव शीश जटा के बीच ।

हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की ॥ २ ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ॥ धृ. ॥

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