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भगवान विष्णूआरती~2 मिनिटे

ॐ जय जगदीश हरे (विष्णू आरती)

रचनाकार: पं. श्रद्धाराम शर्मा (Pandit Shardha Ram Phillauri)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥ ध्रु० ॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का ।

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥ १ ॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी ।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी ॥ २ ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी ॥ ३ ॥

ॐ जय जगदीश हरे ॥ ध्रु० ॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता ।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ॥ ४ ॥

तन-मन-धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा ।

तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥ ५ ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ॥ ध्रु० ॥

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