आरती संग्रह

Aarti Sangraha

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भगवान शिव•अष्टक•~3 मिनिटे

श्री रुद्राष्टकम्

रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas - Ramcharitmanas)

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १ ॥

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥ २ ॥

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं मनोभूतकोटिप्रभाश्रीशरीरम् ।

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनीचारुगङ्गा लसद्भालबालेन्दुकण्ठे भुजङ्गा ॥ ३ ॥

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥ ४ ॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।

त्रयःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५ ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।

चिदानन्दसन्दोहमोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६ ॥

न यावदुमानाथपादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत्सुखं शान्तिसन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७ ॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।

जराजन्मदुःखौघतातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८ ॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥

चरण1/9

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