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श्री गणेशआरती~3 मिनिटे

शेंदूर लाल चढायो (गणपती आरती)

शेंदूर लाल चढायो अच्छा गजमुख को ।

दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहर को ।

हाथ लिए गुडलड्डू सांई सुरवर को ।

महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को ॥ १ ॥

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता ।

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ॥ धृ. ॥

अष्टौ सिद्धि दासी संकट को हारी ।

विघ्न विनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।

कोटि सूरज प्रकाश ऐसी छबि भारी ।

गंडस्थल मदमस्तक झूले शशिबिहारी ॥ २ ॥

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता ।

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ॥ धृ. ॥

भावभगत से कोई शरणागत आवे ।

संतति संपति सबही भरपूर पावे ।

ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।

गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥ ३ ॥

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता ।

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ॥ धृ. ॥

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