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श्री रामचंद्रस्तोत्र~2 मिनिटे

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन (श्री राम स्तुती)

रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas)

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् ।

नव कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम् ॥ १ ॥

कन्दर्प अगणित अमित छबि, नवनील नीरद सुन्दरम् ।

पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ॥ २ ॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनम् ।

रघुनन्द आनन्दकन्द कोशलचन्द दशरथ नन्दनम् ॥ ३ ॥

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणम् ।

आजानुभुज शर चाप धर, संग्राम जित खर दूषणम् ॥ ४ ॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रञ्जनम् ।

मम हृदय कञ्ज निवास कुरु, कामादि खल दल मञ्जनम् ॥ ५ ॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर सांवरो ।

करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ ६ ॥

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